भारत ने 20% एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। यह बदलाव सरकार और किसानों के लिए फायदेमंद है, लेकिन पेट्रोल की कीमतें ज्यादा नहीं गिरी हैं। एथेनॉल सस्ता होने के बावजूद कम कुशल है, जिससे पेट्रोल वाहनों की माइलेज घट गई है। अप्रैल 2020 के बाद बने वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण संभाल सकते हैं, लेकिन पुराने वाहनों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सरकार 2030 तक मिश्रण को 27% बढ़ाने की योजना बना रही है, लेकिन उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं मिल सकता है।