आगामी जेएनयू छात्र संघ चुनाव गरमाती जा रही है, जिसमें एबीवीपी और एनएसयूआई जैसी प्रमुख पार्टियाँ एक तीव्र मुकाबले की तैयारी कर रही हैं। परंपरागत रूप से वाम राजनीति का गढ़ रहे जेएनयू में कुछ छात्र नेता कांग्रेस पार्टी की ओर बढ़ रहे हैं। इससे वाम संघों में वैचारिक भिन्नताओं को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। 4 नवंबर को होने वाले चुनाव में शैक्षणिक स्वतंत्रता और छात्र कल्याण जैसे प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो जेएनयू के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।