भारतीय रुपया नई निचाई पर पहुँच गया है, डॉलर के मुकाबले 92.30 से नीचे गिरकर। वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि के कारण यह गिरावट आई है। ब्रेंट कच्चे तेल के दाम 25% से अधिक बढ़ गए हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। यह स्थिति भारत के चालू खाता घाटे को बढ़ाएगी और रुपये पर और दबाव डालेगी। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं।