स्टीवन स्पीलबर्ग ने हाल ही में एसएक्सएसडब्ल्यू सम्मेलन में टिमोथी चालमेट की विवादास्पद टिप्पणियों के बारे में बात की। चालमेट ने कहा था कि "कोई भी बैले या ओपेरा की परवाह नहीं करता," जो सिनेमा के महत्व पर चर्चा का विषय बना। स्पीलबर्ग ने पारंपरिक कला के महत्व पर जोर दिया, यह दर्शाते हुए कि आज के युग में भी ये महत्वपूर्ण हैं। यह चर्चा भारत जैसे देश में विभिन्न कला रूपों की प्रासंगिकता पर चल रही बहस को उजागर करती है, जहाँ संस्कृति और कला को गहराई से सराहा जाता है।