सुप्रीम कोर्ट आज छात्र कार्यकर्ताओं शार्जील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाने वाला है, जो 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में शामिल हैं। ये कार्यकर्ता पांच साल से जेल में हैं और उन पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर आरोप हैं। उनके वकील तर्क करते हैं कि पुलिस की देरी के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा है और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह निर्णय कार्यकर्ताओं के भविष्य और भारत में नागरिक अधिकारों पर चल रही बहस को प्रभावित कर सकता है।