

एक ग्लेशियर के टूटने से उत्तरकाशी में हाल ही में हुई भूस्खलनों और बाढ़ की घटनाएं हो सकती हैं, विशेषज्ञों का मानना है। उनका कहना है कि भारी बारिश ने ऊंचाई पर एक ग्लेशियर से मलबा ढीला कर दिया, जिससे केहर गंगा नदी में तबाही आई। वैज्ञानिक विश्लेषण अभी चल रहा है, लेकिन क्षेत्र ग्लेशियर गतिविधियों के लिए जाना जाता है, जो भविष्य में आपदाओं की चिंताओं को बढ़ाता है। 2021 की उत्तराखंड बाढ़ जैसी घटनाएं इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर करती हैं।