Banking Stocks Under Pressure: NIM Shrinks, Brokerages Cut Target Prices – Is More Downside Ahead?
भारतीय बैंकिंग सेक्टर एक ऐसे संकट से गुजर रहा है जो ऊपर से दिखाई नहीं देता लेकिन अंदर ही अंदर बैंकों की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ा रहा है।
मार्च 2026 में भारी बिकवाली के बाद अप्रैल में बैंकिंग स्टॉक्स में रिकवरी देखने को मिली, लेकिन ताजा ब्रोकरेज रिपोर्ट्स ने फिर से खतरे की घंटी बजा दी है।
क्या है असली समस्या?
पूरा मामला Net Interest Margin (NIM) के इर्द-गिर्द घूम रहा है। यह वह अंतर होता है जो बैंक लोन पर कमाते हैं और डिपॉजिट पर देते हैं।
लेकिन अब:
डिपॉजिट महंगे हो रहे हैं
लोन रेट उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे
यानी मार्जिन घट रहा है
उदाहरण: अगर बैंक 8% पर लोन देता है और 5% पर FD, तो 3% मार्जिन होता है अब FD रेट बढ़ने से यह अंतर घट रहा है
डेटा क्या कहता है?
दिसंबर 2025 तिमाही में 29 में से सिर्फ 4 बैंक ही NIM बढ़ा पाए
पिछले साल यह संख्या 10 थी
क्रेडिट ग्रोथ: 14.5%
डिपॉजिट ग्रोथ: सिर्फ ~11%
यानी बैंक ज्यादा लोन दे रहे हैं लेकिन पैसा कम जमा हो रहा है
बढ़ता जोखिम: CD Ratio
बैंकों का Credit-Deposit Ratio (CD Ratio) 86% के पार पहुंच गया है
इसका मतलब:
बैंक अपनी जमा राशि का बड़ा हिस्सा पहले ही लोन में दे चुके हैं
आगे लोन देने के लिए पर्याप्त बफर नहीं
ब्रोकरेज की चेतावनी
JM Financial ने टारगेट प्राइस 3%–19% तक घटाए
Motilal Oswal ने FY26-28 earnings growth अनुमान घटाया
अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि FY27 तक सेक्टर में दबाव बना रह सकता है
बैंक दुविधा में
बैंकों के सामने दो विकल्प हैं:
FD ब्याज बढ़ाएं → खर्च बढ़ेगा → मुनाफा घटेगा
FD ब्याज ना बढ़ाएं → डिपॉजिट नहीं आएंगे → लोन देना मुश्किल
यानी “कुएं और खाई” जैसी स्थिति
मार्केट पर असर
Sensex: ~10% गिरावट (2026 में)
Banking Index: ~6% गिरावट
हालांकि हाल ही में रिकवरी दिखी है, लेकिन ट्रेंड अभी भी कमजोर माना जा रहा है
निवेशकों के लिए क्या करें?
एक्सपर्ट्स की सलाह:
शॉर्ट टर्म में सावधानी रखें
गिरावट में selective buying करें
FY27 तक volatility बनी रह सकती है