Strait of Hormuz Crisis: India Summons Iranian Envoy After Attacks on Indian Ships
अप्रैल 2026 में होर्मुज जलडमरूमध्य संकट उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गया जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नेवी ने US नौसेना नाकाबंदी हटने तक जलडमरूमध्य को सभी व्यावसायिक शिपिंग के लिए बंद घोषित कर दिया। इस घोषणा ने वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों में भूचाल ला दिया।
भारत के लिए, इस संकट के गंभीर आर्थिक निहितार्थ थे। भारत अपनी 85% से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। Brent क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने से भारत के आयात बिल पर भारी दबाव पड़ा, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने का खतरा उत्पन्न हुआ।
ईरानी बलों द्वारा भारतीय वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की खबर के बाद भारत सरकार ने ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
मार्च में भारत के LNG आयात पहले से 20.5% बढ़ चुके थे, क्योंकि बिजली कंपनियों और उद्योगों ने रणनीतिक भंडार बनाने की कोशिश की थी। सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की समीक्षा शुरू की और वैकल्पिक कच्चे तेल आपूर्ति मार्गों की खोज भी शुरू हुई।
इस संकट ने भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया। हालांकि, बाद में जब शांति वार्ता और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबरें आईं तो बाजार ने ऐतिहासिक तेजी दर्ज की।