भारत की वायु प्रदूषण एक बढ़ती स्वास्थ्य संकट है, जो तंबाकू के धुएं के खतरों से मिलता-जुलता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषित हवा फेफड़ों को कमजोर करती है और निमोनिया के मामलों को बढ़ाती है, खासकर बच्चों और वृद्धों में। हानिकारक कण जैसे PM2.5 हमारे फेफड़ों में प्रवेश करते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। मास्क पहनने और एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना सहायक हो सकता है, लेकिन सच्चे समाधान परिवहन और पर्यावरणीय नियमों में सुधार की आवश्यकता है। बिना तत्काल कार्रवाई के, प्रदूषित शहरों में सांस लेना एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकता है।