जोड़ों की समस्याएं अब भारत में 30 से 45 वर्ष के लोगों को प्रभावित कर रही हैं, जैसे कार्यशील पेशेवर और युवा माता-पिता। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. आशीष आचार्य बताते हैं कि लंबे समय तक बैठने, तनाव और खराब पोषण जैसी जीवनशैली की वजह से ये समस्याएं बढ़ रही हैं। पीठ, घुटने और गर्दन में दर्द आम हो गया है। प्रारंभिक हस्तक्षेप और नियमित गतिविधियाँ, जैसे कि व्यायाम और शक्ति प्रशिक्षण, दीर्घकालिक क्षति से बचने और जोड़ों के स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।