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COPD स्क्रीनिंग: समय पर पहचान का महत्व

COPD स्क्रीनिंग: समय पर पहचान का महत्व

26 Nov, 2025

Priya Nambiar

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) भारत में एक बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है, जो लगभग 15 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। दुर्भाग्यवश, यह अक्सर गंभीर क्षति होने तक अज्ञात रहती है। स्पायरोमेट्री के माध्यम से जल्दी पहचान—एक सरल फेफड़े की क्रिया परीक्षण—परिणामों में काफी सुधार कर सकती है। COPD अन्य बीमारियों जैसे हृदय रोग और मधुमेह को भी बढ़ा सकता है। इससे निपटने के लिए 45 वर्ष से शुरू होने वाली नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। लक्षणों को जल्दी पहचानकर और बीमारी का प्रबंधन करके, व्यक्ति अपने जीवन की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं और जटिलताओं को कम कर सकते हैं।

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