कई महिलाएँ हार्मोनल समस्याओं से जूझती हैं, अक्सर विभिन्न सप्लीमेंट्स और आहारों का सहारा लेती हैं लेकिन दीर्घकालिक राहत नहीं मिलती। आयुर्वेद एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो हार्मोन्स के बजाय जिगर के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करता है। इस प्राचीन पद्धति के अनुसार, एक स्वस्थ जिगर हार्मोनल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। पीरियड्स, फुलाव, और मूड स्विंग जैसी लक्षण जिगर के तनाव का संकेत हो सकते हैं। जीवनशैली में छोटे बदलाव और आहार के उपाय अपनाकर महिलाएँ जिगर के स्वास्थ्य को समर्थन देकर अपने हार्मोनल संतुलन को बहाल कर सकती हैं।