स्तन कैंसर को अक्सर केवल महिलाओं से जोड़ा जाता है, लेकिन पुरुष भी इस गंभीर स्थिति का शिकार हो सकते हैं। पुरुष स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चिराग भंडारी बताते हैं कि भारत में जागरूकता बेहद कम है; केवल 19% पुरुष जानते हैं कि पुरुषों में स्तन कैंसर हो सकता है। शुरुआती लक्षण, जैसे गांठें या डिस्चार्ज, अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जिसके कारण देर से निदान होता है। उम्र, पारिवारिक इतिहास और हार्मोनल असंतुलन जैसे कारक जोखिम को बढ़ाते हैं। पुरुषों को जागरूकता पर जोर देना चाहिए और समय पर चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि समय पर पहचान से परिणाम में सुधार हो सकता है।