भारत में वायु प्रदूषण केवल एक मौसमी समस्या नहीं है; यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचा रहा है। जैसे-जैसे सर्दियाँ धुंधली होती जा रही हैं, कई लोग थकान, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञ डॉ. रश्मि आर्दे का कहना है कि जहरीले वायु प्रदूषक हमारे मस्तिष्क में घुसकर सूजन पैदा कर रहे हैं, जिससे चिंता और ध्यान की कमी हो रही है। इसका प्रभाव न केवल व्यक्तियों पर बल्कि कक्षाओं और कार्यस्थलों पर भी पड़ा है। वायु गुणवत्ता का ध्यान रखना हमारे भावनात्मक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।